हाँर अाख्नै भाषा र भेसभुषा मत्रै हैन हाँर घर पनि अरूक कहते फरक खालक बाटै । हाँर घर देख्ल बितिकै याे दरैक घर रहलार्इ कहिपनि चिन्ते रहीर । यखेन अार्इपनि याे घर फाेटाेकाँ मत्रै देखीके पाउथार्इर । सबैनी अाधुनिक घर बानार्इके थाल्ल । समय अनुसार परिवर्तन भैकेपरित । सबैनी पुरानाे खालक घरयाँ बसिके परित् कहीके खाेज्ल हैन । हार पुर्खाइ घर बानाते कत्का बिचार करीपनि बानाल रहलार्इ कहिपनि समिक्षा करिके खाेज्ल हाे ।
- सबै कते पहीला त भुकम्प जैने पनि नापल्टलार खालक घर हो यो, किसेकहने गाराे उपरसम्म नापुग्लार भैते खेना भुकम्प अर्इने पनि क्याउ ना भै ।
- हावाहुरीक डर नैजे , किसेकहने घरका छानी हेँठ सम्म अर्इलार र घुमाल भित्ता भैते हावाहुरीर्इँ बल करीके नापार्इ ।
- पानीक डर नैजे । पानी पर्ने पनि घर सबै घुमीके सक्थार्इर। यखेनक घर घुमीके नासकीर ।
- अाङना चारै पटी भैलार भैते सबै सधै सफा भैते रही । अरू त भैहाल्ल मुसाे अाइके नि गाराे पर्तेरिक ।
- दाेइ पटी द्वारी भैलाहार भैते बातास खेलाइके पाउते रही र भित्रक उपरक भाग अलीक उपर भैल भैते जाडाउनाे गर्मीका लगभग एकै खालक तापक्रम भैते रही ।
- हाँर अन्नबालीके राखीके याे घर अघ्घरै राम्र भैते रही ।
- पिँडा अग्ल भैलार भैते साप एेलार डर ना भैते रही ।
बाँकी बाटै कने कमेन्ट बक्सका लेखिके हखार्इ।


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